(ग्रेटर नोएडा) उर्दू शायरी की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले मशहूर शायर बशीर बद्र का गुरुवार को 91 साल की उम्र में इंतकाल हो गया। भोपाल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक और दुख की लहर है। बद्र के निधन पर शायर जादेव अख्तर ने लिखा है कि उर्दू आज से और गरीब हो गई। गौरतलब है कि बशीर बंद्र उर्दू की दुनिया में बहुत बड़ा नाम थे। 15 फरवरी 1935 को भगवान राम की नगरी अयोध्या में हुआ था। उनकी गजलों की एक खास शैली रही। उनकी भाषा सरल, और आम बौलचाल वाली रही। उर्दू साहित्य के लेखन में शानदार योगदान देने के लिए भारत सरका ने साल 1999 में पद्मश्री से सम्मानित भी किया।
बशीर बद्र के कुछ बहतरीन शेर
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता।
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों।
कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो।
