नई दिल्लीः महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के चर्चित मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और उनके सहयोगी विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश अश्विनी पंवार ने बंद कमरे में यह फैसला सुनाया।
यह मामला वर्ष 2023 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहते हुए यौन उत्पीड़न, डराने-धमकाने और पीछा करने जैसे आरोप लगाए थे। इसके विरोध में देश के कई शीर्ष पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक प्रदर्शन किया था।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। जून 2023 में पुलिस ने करीब 1500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की। इसके बाद 10 मई 2024 को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय किए और मामले की सुनवाई शुरू हुई।
फैसला आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें शुरू से अपनी बेगुनाही पर भरोसा था। उन्होंने कहा कि तीन साल बाद अदालत ने उन्हें न्याय दिया है और उनका पहले दिन से कहना था कि यह मामला एक साजिश का हिस्सा था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं को कभी अपराधी नहीं माना और आगे भी खिलाड़ियों के हितों के लिए काम करते रहेंगे।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि शिकायतकर्ता पक्ष चाहे तो वह इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने का विकल्प रखता है।
